माँ मैं छोटा हुईं तू मुझे छोटा ही रहने दे!!!

माँ  मैं  छोटा  हुईं  तू  मुझे  छोटा  ही रहने  दे ,
अपनी  ममता  की  छाव मैं  उंही  मुझे  जीने  दे

जो गर हुआ बड़ा तो , तुझसे  दूर  मुझे  जाना  होगा ,
औरो की  तरह  मुझे  भी अपना एक  घर  बनना  होगा
क्या  मैं  नही  खेल  सकता ,हमेशा  उही तेरे  आंगन मैं
माफ़  कर  दे  मुझे, अब  कभी  शैतानी  नही  करूंगा
मैं  खुश  हूं  यहां  मुझे  खुश  हें  रहने  दे

लोग  बड़े होकर, समझदार बन कर, काम  करते  हैं
और ज़िन्दगी  की  भाग  दौड़  मैं  खो  जाते  हैं
क्यों चाहती है तू  की  में  भी जाउं  उस  भीड़  मैं,
मैं हु नादान, मुझे माफ़ कर और नादान  ही  रहने दे.

तू  कुछ  भी  कर  ले अब बड़ा  नही  होना  मुझे ,
तू  ही   है  सब  कुछ  मेरे  लिए , मुझे  अपने   पास  रहने  दे
तेरी  गोदी  मैं  खेलूं , सो  जाउं  और  आँख   खोलूं
ये  हैं  जन्नत  मेरी  मुझे  मेरी  जन्नत  मैं  रहने दे

माँ  मैं  छोटा  हुईं  तू  मुझको  छोटा  हें  रहने  दे ,
अपनी  ममता  की  छाव  मैं  उहीं  मुझे  जीने  दे

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